सास बहु के बीच मे बहुत जगड़े होने के ज्योतिष कारण
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Sep 19
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भारतीय फॅमिली मे सास और बहु सब से मुख्य व्यक्ति होते है। अगर इन दोनों मे सब सही चल रहा है और एक दूसरे के प्रति प्रेम रहता है तो घर मे खुशी और तरक्की आना तय है, पर आज कल फॅमिली मे सास बहु के जगड़े बहुत सामान्य बात हो गई है । ज्योतिष शास्त्र में सास-बहू के बीच झगड़ों के कई कारण बताए गए हैं। अक्सर यह ग्रहों की स्थिति, विशेषकर चंद्र, शुक्र, मंगल और छठे भाव से संबंधित होती है।

सास बहु के बीच जगड़े के मुख्य ज्योतिषीय कारण दिए जा रहे हैं:
🌙 ज्योतिषीय कारण
चंद्रमा (मन और भावनाएँ)
यदि बहू की कुंडली में चंद्रमा पीड़ित (राहु, केतु या शनि से ग्रस्त) हो तो सास के साथ भावनात्मक तालमेल बैठाना कठिन होता है।
सास की कुंडली में भी ऐसा ही होने पर आपसी समझ कम होती है।
मंगल (गुस्सा और अहं)
बहू या सास की कुंडली में क्रूर मंगल (विशेषकर चौथे, सातवें या आठवें भाव में) हो तो झगड़े बढ़ते हैं।
मंगल दोष (मांगलिक योग) के चलते घर में कलह की स्थिति बन सकती है।
छठा भाव (झगड़ा और शत्रुता का भाव)
यदि बहू की कुंडली का छठा भाव सास की कुंडली के चंद्रमा या लग्न पर प्रभाव डाले तो आपसी टकराव अधिक होता है।
छठे भाव में राहु या शनि होने से भी सास-बहू के बीच प्रतियोगिता और कलह होती है।
चौथा भाव (घर और माँ का भाव)
बहू की कुंडली में चौथा भाव (जो सास और परिवार की सुख-शांति का प्रतिनिधित्व करता है) अगर पाप ग्रहों से प्रभावित हो तो घर में शांति भंग होती है।
शुक्र और बृहस्पति का संबंध
शुक्र (गृहस्थ सुख) और बृहस्पति (बड़ों का आशीर्वाद) अगर नीच या पीड़ित हों तो वैवाहिक जीवन और पारिवारिक संबंधों में तनाव आता है।
🌙 ज्योतिषीय नुकसान (कलह के प्रभाव)
गृह कलह (चौथा भाव प्रभावित)
चौथा भाव घर का सुख और माता का स्नेह बताता है।
जब यह भाव बार-बार झगड़े से अशांत होता है, तो परिवार में शांति नष्ट होती है और गृहलक्ष्मी का प्रभाव घटता है।
धन की हानि (ग्यारहवां और दूसरा भाव)
घर में अशांति होने पर लक्ष्मी स्थिर नहीं रहती।
राहु-केतु या शनि की दृष्टि से धन रुकावटें, अनावश्यक खर्च और कर्ज की स्थिति बनने लगती है।
स्वास्थ्य की हानि (चंद्र और छठा भाव)
चंद्रमा मन और स्वास्थ्य को नियंत्रित करता है।
झगड़े से मानसिक तनाव बढ़ता है, जिससे नींद, ब्लड प्रेशर, हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएँ आती हैं।
संतान सुख में कमी (पाँचवाँ भाव प्रभावित)
यदि परिवार में लगातार कलह हो, तो संतान के मन पर भी बुरा असर पड़ता है।
पाँचवाँ भाव (संतान और शिक्षा) बाधित होकर बच्चों की पढ़ाई और संस्कार पर नकारात्मक प्रभाव डालता है।
पति-पत्नी संबंध पर असर (सातवाँ भाव)
बहू और सास का झगड़ा पति को बीच में फँसाता है।
सातवें भाव में कलह के कारण वैवाहिक जीवन में दरार और दूरी बढ़ती है।
कर्म और भाग्य पर असर (नवम और दशम भाव)
परिवार में अशांति से व्यक्ति का मन काम में नहीं लगता।
नौवाँ भाव (भाग्य) और दसवाँ भाव (कर्म) कमजोर होकर नौकरी, व्यापार और सामाजिक मान-सम्मान पर बुरा असर डालते हैं।
NOTE:- यहा दी गई जानकारी केवल जागृतता हेतु दी गई है, आगे बढ़ने से पहले कृपया किसी विधवान ज्योतिषी से मार्गदर्शन अवश्य ले।
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