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बिजनस मे बार बार सफलता काफी करीब आके छिन जाती है ?

  • Writer: Namaskar Astro by Acharya Rao
    Namaskar Astro by Acharya Rao
  • Sep 15
  • 2 min read

जीवन में बार-बार सफलता एकदम नजदीक आकर छिन जाने की स्थिति को ज्योतिष में कई तरह से देखा जा सकता है। बिजनेस में बार-बार सफलता के करीब आकर असफल हो जाना एक गंभीर और निराशाजनक स्थिति हो सकती है। अगर हम इसे ज्योतिष (Vedic Astrology) के दृष्टिकोण से देखें, तो इसके पीछे कुछ ग्रहों की स्थिति और दशाएं जिम्मेदार हो सकती हैं। नीचे कुछ मुख्य ज्योतिषीय कारण दिए गए हैं।

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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार बिजनस मे बार बार असफल होने के मुख्य कारण।


🔯 1. शनि (Saturn) की प्रतिकूल स्थिति

  • शनि का कुप्रभाव देरी, रुकावट और बार-बार की असफलता देता है।

  • यदि शनि लग्न, दशम भाव (10वां), या लाभ भाव (11वां) में पीड़ित हो, तो व्यक्ति की मेहनत रंग नहीं लाती।

  • साढ़ेसाती या ढैय्या के समय बिजनेस में नुकसान या बार-बार की असफलता हो सकती है।

🔯 2. दशा/अंतर्दशा का प्रभाव

  • किसी अशुभ ग्रह की दशा या अंतर्दशा (जैसे राहु, केतु, शनि) चल रही हो तो यह विफलता दे सकती है।

  • कभी-कभी शुभ ग्रहों की भी दशा यदि नीच राशि में हो या शत्रु भाव में हो, तो विपरीत प्रभाव देती है।

🔯 3. ग्रहों की नीचता या अस्त स्थिति

  • यदि व्यवसाय से संबंधित ग्रह जैसे बुध (बिजनेस का कारक) या शुक्र (वाणिज्य, विलास, लाभ) नीच राशि में हो या अस्त हो, तो परिणाम नकारात्मक हो सकते हैं।

🔯 4. दशम भाव (10वां घर) की कमजोरी

  • यह घर करियर, व्यापार और पेशे का होता है।

  • यदि यह भाव शत्रु ग्रहों से ग्रस्त हो, या यहाँ पाप ग्रह जैसे राहु, केतु, शनि बैठें हों, तो बिजनेस में रुकावटें आती हैं।

🔯 5. राहु-केतु का प्रभाव

  • राहु भ्रम और धोखे का कारक होता है — यह व्यक्ति को गलत निर्णय दिला सकता है।

  • राहु यदि 10वें, 7वें या 6ठे भाव में हो, तो व्यापार में धोखा, नुकसान और झूठे सपने दिखाता है।

🔯 6. लग्न (Ascendant) और लग्नेश की स्थिति

  • लग्न और लग्नेश कमजोर हो, नीच में हो या शत्रु ग्रहों से पीड़ित हो, तो आत्मविश्वास और निर्णय क्षमता प्रभावित होती है — जिससे व्यक्ति अंतिम समय पर असफल हो सकता है।

🔯 7. विपरीत योग (Inauspicious Yogas)

कुछ ऐसे योग भी होते हैं जो बार-बार की असफलता देते हैं:

  • Daridra Yoga (दरिद्र योग): आर्थिक समस्याएं, ऋण, असफलता।

  • Kemadruma Yoga (केमद्रुम योग): मानसिक असंतुलन, बार-बार अवसर छूटना।

  • Vish Yoga (शनि-चंद्र का संयोग): मानसिक तनाव, असफल प्रयास।


NOTE :- यहा दी गई जानकारी का उदेश्य केवल जागृतता फेलाना है, कृपया आगे बढ़ने से पहले किसी विद्धवान ज्योतिष परामर्श अवश्य करे।


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