पिता से अनबन के ज्योतिषीय कारण – सूर्य, शनि और नवम भाव का रहस्य
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Nov 10
- 2 min read
क्या आपकी कुंडली में पिता से मतभेद या दूरी के संकेत हैं?
क्या पिता-पुत्र के बीच संबंधों में तनाव बना रहता है?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसके पीछे ग्रहों का गहरा प्रभाव होता है।
आइए जानते हैं कि किन ग्रहों और भावों से पता चलता है पिता से अनबन के योग।

🪐 1. सूर्य ग्रह की स्थिति (पिता का प्रमुख ग्रह)
जन्म कुंडली में सूर्य (Surya) पिता, आत्मविश्वास और सम्मान का प्रतिनिधित्व करता है।यदि सूर्य नीच राशि (तुला) में हो या उस पर राहु, शनि या केतु की दृष्टि हो, तोपिता से टकराव, अहंकार संघर्ष या मानसिक दूरी के योग बनते हैं।
उदाहरण:
सूर्य षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव में स्थित हो।
सूर्य और शनि का युति योग बने।
सूर्य–राहु की युति (ग्रहन योग) हो।
🌗 2. शनि का प्रभाव
शनि (Saturn) कर्म और अनुशासन का ग्रह है।जब यह सूर्य पर प्रभाव डालता है तो generation gap, अहंकार टकराव या दूरी का कारण बनता है।सूर्य–शनि युति विशेष रूप से पिता से रिश्ते में ठंडापन लाती है।
🌘 3. राहु और केतु का प्रभाव
राहु भ्रम और विद्रोह का प्रतीक है, जबकि केतु विरक्ति और अलगाव का।जब सूर्य के साथ राहु या केतु बैठा होता है, तो पिता से गलतफहमियाँ और भावनात्मक दूरी देखी जाती है।
🏠 4. नवम भाव (9th House) की भूमिका
नवम भाव धर्म, भाग्य और पिता का भाव है।अगर इस भाव पर पाप ग्रहों की दृष्टि हो या राहु-केतु की स्थिति, तो पिता से संबंधों में उतार-चढ़ाव आते हैं।
उदाहरण:
नवम भाव में राहु हो → पिता से विचारों में मतभेद।
नवमेश (9th Lord) नीच राशि में हो → पिता की सलाह न मानने की प्रवृत्ति।
🔯 5. दशा और गोचर का प्रभाव
कभी-कभी अनबन अस्थायी होती है, जो ग्रह दशा या गोचर के कारण होती है।जैसे सूर्य–शनि की प्रतिकूल दशा या राहु का नवम भाव से गोचर पिता-पुत्र के रिश्ते में तनाव ला सकता है।
🪔 निष्कर्ष (Conclusion)
ज्योतिष के अनुसार पिता से अनबन केवल स्वभाव या परिस्थितियों का परिणाम नहीं होती,बल्कि यह ग्रहों की स्थिति और पिछले कर्म संबंधों से भी जुड़ी होती है।यदि कुंडली में सूर्य, शनि या राहु जैसे ग्रह आपस में टकराव की स्थिति बना रहे हों,तो पिता-पुत्र के बीच विचारों का अंतर और भावनात्मक दूरी स्वाभाविक रूप से दिखाई देती है। लेकिन यह स्थिति स्थायी नहीं होती —उचित उपाय, संयम और पिता के प्रति सम्मान से इस संबंध को पुनः मधुर बनाया जा सकता है।सूर्य को जल अर्पण, गायत्री मंत्र जप और पितृ पूजन जैसे उपाय न केवल ग्रहों को शांत करते हैंबल्कि मन में पिता के प्रति श्रद्धा और समझ भी गहरी करते हैं।
लेखक: Acharya Sunita Rao
प्रस्तुतकर्ता: namskarastro.com
श्रेणी: ज्योतिष / पारिवारिक संबंध
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