नकारात्मक ऊर्जा क्या है? ज्योतिष शास्त्र से जानें इसके कारण और लक्षण
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Oct 30
- 2 min read
क्या आपने कभी महसूस किया है कि सब कुछ सही होने के बावजूद जीवन में अजीब सी थकान, रुकावट या बेचैनी बनी रहती है?इसी स्थिति को ज्योतिष शास्त्र में “नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy)” कहा गया है। यह ऊर्जा अदृश्य होते हुए भी हमारे विचार, मनोभाव, स्वास्थ्य और सफलता पर गहरा असर डालती है।
ज्योतिष शास्त्र (Astrology) के अनुसार जब किसी व्यक्ति की कुंडली में कुछ ग्रह — जैसे राहु, केतु, शनि या कमजोर चंद्रमा — अशुभ स्थिति में होते हैं, तब यह नकारात्मक ऊर्जा बढ़ जाती है।ऐसी ऊर्जा न केवल व्यक्ति की मानसिक शांति छीन लेती है, बल्कि घर-परिवार और करियर में भी रुकावटें पैदा करती है।

इस ब्लॉग में हम विस्तार से जानेंगे
👉 नकारात्मक ऊर्जा क्या है,
👉 यह कैसे बनती है,
👉 इसके ज्योतिषीय कारण और लक्षण क्या हैं,
🔮 1. नकारात्मक ऊर्जा क्या है ज्योतिष के अनुसार
ज्योतिष कहता है कि नकारात्मक ऊर्जा तब उत्पन्न होती है जब —
ग्रहों की स्थिति अशुभ हो जाती है,
किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु, केतु, शनि, मंगल जैसे ग्रहों का दोष होता है,
या घर के वातावरण में वास्तु दोष, टूटी-फूटी वस्तुएं, अशुद्ध ऊर्जा होती है।
यह ऊर्जा अदृश्य होती है, परंतु इसका असर हमारे मूड, सोच, निर्णय और भाग्य पर दिखाई देता है।
🌗 2. कुंडली में नकारात्मक ऊर्जा के संकेत
अगर कुंडली में निम्न योग हों, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव ज्यादा रहता है:
राहु–केतु का प्रमुख स्थानों (लग्न, चतुर्थ, सप्तम, दशम) में होना
शनि का पाप दृष्टि या पाप ग्रहों से युति
चंद्रमा कमजोर या पापग्रहों से प्रभावित होना (मानसिक बेचैनी, चिंता)
आठवां या बारहवां भाव सक्रिय रहना (छुपे शत्रु, भय, भ्रम)
🌼 3. नकारात्मक ऊर्जा के लक्षण
अचानक गुस्सा या उदासी रहना
नींद में परेशानी या डरावने सपने
काम में रुकावटें और हानि
घर में बार-बार झगड़े
पौधों का मुरझाना या जानवरों का बेचैन रहना
✨ निष्कर्ष
ज्योतिष के अनुसार नकारात्मक ऊर्जा केवल बाहरी नहीं, बल्कि भीतरी सोच और ग्रह स्थिति से भी जुड़ी होती है।यदि हम अपने ग्रहों की स्थिति सुधारें, सकारात्मक कर्म करें और आध्यात्मिकता अपनाएं, तो नकारात्मक ऊर्जा स्वतः ही दूर हो जाती है।
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