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कैंसर रोग के ज्योतिषीय कारण: कौन से ग्रह बनाते हैं इस गंभीर बीमारी के योग

  • Writer: Namaskar Astro by Acharya Rao
    Namaskar Astro by Acharya Rao
  • Nov 1
  • 3 min read

कैंसर आज के समय की सबसे गंभीर बीमारियों में से एक मानी जाती है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसकी जड़ें केवल शरीर तक सीमित नहीं होतीं?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमारे जीवन की हर घटना—चाहे वह सुख हो या रोग—हमारी कुंडली में ग्रहों की स्थिति से गहराई से जुड़ी होती है।

जब कुछ ग्रह विशेष भावों में अशुभ प्रभाव डालते हैं, तब शरीर की ऊर्जा असंतुलित हो जाती है, जिससे कैंसर जैसी दीर्घ और जटिल बीमारियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।


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🔮 कैंसर रोग के लिए जिम्मेदार ग्रह (Planets Responsible for Cancer Disease)

🪐 1. राहु (Rahu) — मुख्य ग्रह

  • राहु कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि (abnormal cell growth) का प्रतीक है।

  • जब राहु चंद्रमा या शनि के साथ आता है, तो शरीर में tumor या cancerous cells बनने लगते हैं।

  • राहु का छठे, आठवें या बारहवें भाव में होना या इन भावों के स्वामियों से संबंध होना कैंसर जैसी बीमारी के योग बना सकता है।


🌑 2. चंद्रमा (Moon) — मानसिक और शारीरिक तरल तत्वों का कारक

  • चंद्रमा शरीर के द्रव, रक्त और ग्रंथियों से संबंधित है।

  • यदि चंद्रमा राहु या केतु के साथ हो (चंद्र-राहु / चंद्र-केतु दोष), तो शरीर की कोशिकाओं में असंतुलन उत्पन्न होता है।

  • कमजोर या पीड़ित चंद्रमा इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना बढ़ जाती है।



🔥 3. मंगल (Mars) — रक्त और ऊर्जा का ग्रह

  • मंगल रक्त, शक्ति और शरीर की ऊर्जा से जुड़ा है।

  • यदि मंगल पाप ग्रहों (राहु, शनि, केतु) से पीड़ित हो, तो blood cancer या internal tumor जैसी स्थितियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।


🪶 4. शनि (Saturn) — दीर्घ रोगों का कारक

  • शनि दीर्घकालिक बीमारियों और शरीर में धीरे-धीरे बढ़ने वाले रोगों से जुड़ा है।

  • जब शनि का संबंध 6th, 8th या 12th भाव से बनता है, तो यह दीर्घ और कठिन रोगों का कारण बन सकता है।

  • यदि शनि और राहु का मेल हो, तो कैंसर के योग और भी प्रबल हो जाते हैं।


🕉️ 5. केतु (Ketu) — अदृश्य रोगों और कोशिका विनाश का ग्रह

  • केतु शरीर में उन बीमारियों का कारण बनता है जो पहचान में देर से आती हैं, जैसे – कैंसर, स्किन डिज़ीज़ या न्यूरोलॉजिकल समस्याएँ।

  • केतु और शनि का संयोजन या इनका संबंध 8वें भाव से हो तो यह कैंसर जैसी बीमारियों को जन्म दे सकता है।


⚖️ सारांश

ग्रह

भूमिका

प्रभाव

राहु

कोशिकाओं की अनियंत्रित वृद्धि

ट्यूमर, कैंसर

चंद्रमा

शरीर के द्रव तत्व, मानसिक स्थिति

ग्रंथियों और ब्लड से जुड़ा कैंसर

मंगल

रक्त और ऊर्जा

ब्लड कैंसर या आंतरिक सूजन

शनि

दीर्घ रोग, कमजोरी

कैंसर का लम्बा असर

केतु

अदृश्य रोग, सेल विनाश

शरीर के अंदर बढ़ते रोग

🔮 कैंसर रोग के ज्योतिषीय योग


1. छठा, आठवां और बारहवां भाव (Trik Bhav)

  • ये तीनों भाव रोग, शत्रु और हानि से संबंधित होते हैं।

  • यदि इन भावों के स्वामी या इनमें बैठे ग्रह पीड़ित हों (malefic influence में हों), तो शरीर में गंभीर रोग उत्पन्न हो सकते हैं।

  • 8वां भाव दीर्घ रोगों और अज्ञात बीमारियों से जुड़ा है।

  • यदि 8वें भाव में पाप ग्रह (शनि, राहु, केतु, मंगल) हों या उस भाव के स्वामी कमजोर हों, तो शरीर में कैंसर जैसी बीमारी की संभावना बढ़ जाती है।


निष्कर्ष (Conclusion)

कैंसर जैसी बीमारी केवल शारीरिक नहीं, बल्कि ऊर्जात्मक असंतुलन का परिणाम भी हो सकती है।ज्योतिष शास्त्र हमें यह समझने में मदद करता है कि कौन से ग्रह हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं और उनके प्रभाव को कैसे कम किया जा सकता है।सही समय पर ज्योतिषीय परामर्श और उपाय अपनाने से न केवल रोग की तीव्रता कम हो सकती है, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा भी बढ़ती है।


Namaskar Astro से जुड़ें और जानें आपकी कुंडली में कौन से ग्रह स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं।

Acharya Sunita Rao से व्यक्तिगत परामर्श के लिए संपर्क करें — सही उपाय, सही समय पर।


 
 
 

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