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"कुंडली के वो 5 खतरनाक दोष जो जीवन में ढेर सारी परेशानियां दे सकते है"

  • Apr 13, 2024
  • 3 min read

किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसकी कुंडली विशेष महत्व रखती है. जन्म की तारीख, जन्मस्थान और जन्म के समय के आधार पर ग्रह नक्षत्रों की गणना होती है, जिससे कुंडली में मौजूद गुण-दोषों के बारे में पता चलता है. ज्योतिष के अनुसार कुंडली में मौजूद दोष जीवन की बहुत सी चीजें तय करते हैं. कठिन मेहनत के बाद भी परिणाम सकारात्मक न मिले, तो हो सकता है कि कुंडली में मौजूद कोई दोष आपके बनते हुए कामों को बिगाड़ रहा है. ऐसे ही 5 खतरनाक दोष हैं, जिनमें से कुंडली में किसी एक की भी मौजूदगी से बुरा समय शुरू हो सकता है.


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5 Most Dangerous Dosha in Horoscope:

कुंडली में मौजूद गुण-दोष व्यक्ति के जीवन पर बड़ा असर डालते हैं. ज्योतिष में ऐसे ही 5 सबसे खतरनाक दोषों के बारे में बताया गया है. जब किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई अशुभ ग्रह किसी शुभ ग्रह के साथ संयोजन करता है तो ऐसी स्थिति में कुंडली दोष का निर्माण होता है. इन दोषों की वजह से व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की समस्याएं आ सकती हैं. ये दोष आर्थिक स्थिति, करियर, रिश्तों में दिक्कतें, बीमारियों के अलावा समाज में मान-सम्मान और प्रतिष्ठा की हानि जैसे कई स्थायी प्रभाव डालते हैं. आइए जानते हैं कुंडली के 5 सबसे खतरनाक दोष और के बारे में.


1.कालसर्प दोष (kaal sarp Dosh)

कालसर्प दोष का नाम सुनकर ही लोग परेशान हो जाते हैं, लेकिन यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो उसे समझने की जरूरत हैं, परेशान होने की नहीं. कुंडली में कालसर्प दोष राहु और केतु के एक साथ आने से होता है. इसके अलावा यदि सभी सात प्रमुख ग्रह राहु और केतु ग्रह की धुरी के भीतर होते हैं तो भी व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प दोष उत्पन्न होता है. इस दोष की वजह से जीवन में अधिक संघर्ष रहता है. बार-बार बनते-बनते काम बिगड़ जाते हैं.


2.मंगल दोष (Mangal Dosh)

वैदिक ज्योतिष में मंगल दोष की गिनती खतरनाक दोषों में होती है. ये दोष रिश्तों में तनाव की वजह बनता है. जब कुंडली में प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम अथवा द्वादश भाव में मंगल होता है, तब मांगलिक दोष लगता है. इस दोष को विवाह के लिए अशुभ माना जाता है. एक सफल सुखद वैवाहिक जीवन के लिए बेहद आवश्यक है कि दोनों ही जीवन साथी की कुंडली में मंगल दोष ना हो. यदि किसी एक की कुंडली में मंगल दोष है, तो विवाह के बाद रिश्ते में प्रतिकूल प्रभाव दिखाई देने लगते हैं.


3.केन्द्राधिपति दोष (Kendradhipati Dosh)

जब भी किसी शुभ ग्रह की राशि केंद्र में होती है तो उसको केन्द्राधिपति दोष लग जाता है. शुभ ग्रह यानि बृहस्पति, बुध, शुक्र, और चंद्रमा. इनमें से बृहस्पति और बुध के कारण होने वाला यह दोष और भी गंभीर और प्रभावी माना जाता है. पहला, चौथा, सातवां और दसवां केंद्र भाव होता है. इसके बाद शुक्र और चंद्रमा का दोष आता है. उपरोक्त दोष केवल शुभ ग्रहों अर्थात बृहस्पति ग्रह, बुध ग्रह, चंद्रमा ग्रह और शुक्र ग्रह पर लागू होता है. यह शनि, मंगल, और सूर्य जैसे ग्रहों पर लागू नहीं होता है. इस दोष की वजह से व्यक्ति को करियर से संबंधित परेशानियां जैसे नौकरी जाना, व्यापार में दिक्कतें, पढ़ाई से संबंधित परेशानी, शिक्षा की हानि आदि परेशानियां झेलनी पड़ सकती हैं.


4.पितृ दोष (Pitra Dosh)

इस दोष के बारे में तो अमूमन ज्यादातर लोग जानते ही हैं. जिस किसी व्यक्ति के पितृ प्रसन्न नहीं होते हैं, उनकी कुंडली में इस दोष का निर्माण होता है. हर साल आने वाले पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध न करने, श्राद्ध कर्म में भाग न लेने और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-पाठ नहीं करने से ये दोष हावी हो जाता है और व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की समस्याएं उत्पन्न कर सकता है. इसके अलावा जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु के साथ सूर्य का संयोजन हो या केतु के साथ सूर्य ग्रह का संयोजन हो तो ऐसी स्थिति में भी पितृ दोष बनता है. इस दोष की वजह से जीवन में विकास रुक जाता है. ऐसे व्यक्तियों की या तो नौकरी लगती नहीं है या लगती है तो बहुत ही कम वेतन वाली. ऐसे व्यक्तियों की धन हानि होने लगती है.


5.गुरु चांडाल दोष (Guru chandal Dosh)

सबसे बड़े नकारात्मक दोषों में से एक दोष 'गुरु-चांडाल' दोष है. अगर कुंडली में राहु बृहस्पति एक साथ हों तो यह दोष बन जाता है. कुंडली में कहीं भी यह दोष बनता हो हमेशा नुकसान ही करता है. अगर यह लग्न, पंचम या नवम भाव में हो तो विशेष नकारात्मक होता है. गुरु-चांडाल दोष का अगर समय पर उपाय न किया जाए तो कुंडली के तमाम शुभ योग भंग हो जाते हैं. अक्सर यह दोष होने से व्यक्ति का चरित्र कमजोर होता है. इस योग के होने से व्यक्ति को पाचन तंत्र, लिवर की समस्या और गंभीर रोग होने की सम्भावना बनती है. ऐसे व्यक्ति फिजूलखर्ची में या इधर-उधर धन खर्च कर देते हैं और अपने भविष्य के बारे में ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते

 
 
 

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