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"Unraveling the Astrological Causes of Family Disputes and Effective Solutions"

  • Jul 20, 2024
  • 2 min read

परिवार में लड़ाई-झगड़े होना एक सामान्य समस्या है, जिसका सामना लगभग हर परिवार को करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, परिवार में लड़ाई-झगड़े होने के कई कारण हो सकते हैं।

यहाँ कुछ प्रमुख कारण हैं

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लड़ाई-झगड़े कई कारणों से हो सकते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख कारण हैं:


1. ग्रहों की स्थिति:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति परिवार में लड़ाई-झगड़े का कारण बन सकती है। उदाहरण के लिए, मंगल और शनि की स्थिति अक्सर लड़ाई-झगड़े का कारण बनती है।


2. राशि और नक्षत्र:

व्यक्ति की राशि और नक्षत्र भी परिवार में लड़ाई-झगड़े का कारण बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, मेष और कन्या राशि के लोग अक्सर लड़ाई-झगड़े में पड़ते हैं।


3. कुंडली में दोष:

कुंडली में दोष भी परिवार में लड़ाई-झगड़े का कारण बन सकते हैं। उदाहरण के लिए, पितृ दोष और मातृ दोष अक्सर परिवार में लड़ाई-झगड़े का कारण बनते हैं।


4. गृह काल:

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गृह काल भी परिवार में लड़ाई-झगड़े का कारण बन सकता है। उदाहरण के लिए, जब गृह काल में मंगल और शनि की स्थिति होती है, तो परिवार में लड़ाई-झगड़े हो सकते हैं।


इन कारणों को ध्यान में रखते हुए, ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, परिवार में लड़ाई-झगड़े को कम करने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं:


1. ग्रहों की शांति:

ग्रहों की शांति करने के लिए, व्यक्ति को ग्रहों के अनुसार पूजा-पाठ और दान करना चाहिए।


2. राशि और नक्षत्र के अनुसार उपाय:

व्यक्ति को अपनी राशि और नक्षत्र के अनुसार उपाय करने चाहिए। उदाहरण के लिए, मेष और कन्या राशि के लोगों को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए।


3. कुंडली में दोष की शांति:

कुंडली में दोष की शांति करने के लिए, व्यक्ति को पूजा-पाठ और दान करना चाहिए।


4. गृह काल का ध्यान:

व्यक्ति को गृह काल का ध्यान रखना चाहिए और उसी के अनुसार अपने कार्यों को करना चाहिए।


किसी भी व्यक्ति के लिए परिवार सब से महत्वपूर्ण होता है, वो अपने परिवार को खुश रखने के लिए उन की छोटी से छोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जान लगा देता है, ऐसे में परिवार वालो को भी उसको प्यार ओर सन्मान देना चाहिए खास करके घर की स्त्री को अपने पति को पूरा सन्मान देना चाहिए,

अगर कभी वो आप की कोई मांगे पूरी न भी कर पाए तो उस की मजबूरी समझ नि चाहिए ओर उस का साथ देना चाहिए ना कि उसे ताने मारके ओर परेशान करे।




 
 
 

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