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"Understanding the Astrological Influences on Aggressive and Violent Behavior in Children"

  • Apr 26, 2024
  • 2 min read

किसी भी बच्चे का व्यवहार माता पिता ,परिवार के अन्य सदस्य और पड़ोसियों के व्यवहार से प्रभावित तो होता ही है पर कुछ ज्योतिषी कारण भी है जिस से बच्चा क्रोधी,जिद्दी,आलसी और हिंसक स्वभाव का बन जाता है, किसी भी बच्चे का स्वभाव उस के जन्म समय के ग्रह नक्षत्र की स्थिति मुख्य रूप से कारक होती है,

काफी बार जन्म समय इन की गलत स्थिति बच्चे को हिंसक और गुस्सैल बना देती है ।


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ग्रहों की यह स्थिति बनाती है बच्चे को जिद्दी

  • यदि बच्चे की कुंडली में मंगल और बुध ग्रह एक साथ हों, तो ऐसे बच्चों को बहुत जल्द गुस्सा आता है और जिद्दी स्वभाव के होते हैं.

  • कुंडली में लग्नेश ग्रह का राहु के साथ होने से भी बच्चा जिद्दी और मनमानी करने वाला होता है.

  • बच्चों की कुंडली में सूर्य और मंगल का योग बच्चों को क्रोधी और जिद्दी बनाता है.

  • जब कुंडली में मंगल और राहु एक साथ हों तो बच्चा आक्रामक स्वाभाव का होता है. छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा करने लगता है और अपनी जिद्द के आगे किसी की भी नहीं सुनता है.

  • कुंडली में बृहस्पति और राहु के योग से गुरुचाण्डाल योग बनता है. जो बच्चे को नकारात्मक व्यवहार करने का कारक बनता है.

  • कुंडली में मंगल और केतु का योग भी बच्चों में क्रोध और जिद्दी स्वभाव पैदा करता है.

  • जिन बच्चों की कुंडली में लग्न भाव में मंगल विराजमान हो तो वे जिद्द और मनमानी करते है.

  • वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक अगर कुण्डली के प्रथम या पंचक भाव में शनि ग्रह नकारात्मक या अशुभ स्थिति में हो तो बच्चा आलसी होता है।

  • शनि कर्म के स्वामी है और शनि के अशुभ प्रभाव से वो बच्चे को कर्म करने से रोकते है और बच्चा आलसी हो जाता है.


ग्रहों की यह स्थिति बनाती है बच्चे को गुस्सैल और हिंसक

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक कुंडली का प्रथम भाव को स्वभाव या प्रकृति का स्थान माना जाता है ,

साथ ही कुंडली का पंचम भाव बुद्धि का भाव होता है,

यह भी बच्चे की प्रकृति को प्रभावित करता है,ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को गुस्सा, जिद्दी स्वभाव,हिंसक प्रकृति और उटपटांग प्रवृति का कारक ग्रह माना गया है,

अगर मंगल ग्रह इन भावो में नीच या अशुभ स्थिति में हो तो बच्चा गुस्सैल,आलसी और जिद्दी होता है, वो बात बात पर गुस्सा करता है पढ़ाई या अपने कुछ नैतिक काम करने से भी वो बचता है,

और अगर माता पिता या परिवार का कोई सदस्य अगर उसे वो करने को बोले तो वो गुस्से में उन्हे या खुद को नुकसान भी पहुंचा सकता है।


NOTE:- अगर आप के बच्चे के साथ भी यह प्रोब्लम हो रही है तो किसी विद्वान एस्ट्रोलॉजर से जरूर सलाह ले, इसे अनदेखा कर ने का बुरा परिणाम भुगत ना पड़ सकता है।

 
 
 

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