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Uncovering the Cosmic Influences: The Astrological Causes of Lifelong Fluctuations

  • May 21, 2024
  • 3 min read

कुंडली में ग्रहों की यह स्थिति जातक को कंगाल बनाती है,

जीवन में ग्रहों की स्थिति के हिसाब से व्यक्ति के जीवन में कई तरह के उतार चढ़ाव देखने को मिलते हैं. कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण मनुष्य का जीवन नरक बन जाता हैं. वह लगातार धन कमाने के बाद भी कर्ज में डूबता चला जाता हैं. धन संबंधी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है. कभी- कभी आपके लाख मेहनत करने के बाबजूद भी पैसा नहीं टिकता है और आप आर्थिक रूप से कमजोर होने लग जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र में कहा गया हैं कि इसकी वजह कुंडली में मौजूद ग्रह होते हैं. इन ग्रहों की स्थिति खराब होने से व्यक्ति को एक-एक पैसे के लिए भी मोहताज होना पड़ता है.


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आइए जानते हैं आखिर वह कौन- कौन से ग्रह हैं, जिसके कारण ऐसी हालत बनती है,


कर्म के देवता शनिदेव

ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को सूर्यदेव का सबसे बड़ा पुत्र और न्याय के देवता व कर्मफल दाता माना जाता है, लेकिन इसके साथ ही पितृ शत्रु भी. शनि ग्रह को अशुभ व दुख का कारक भी माना जाता है, जब किसी जातक की कुंडली में शनि ग्रह बैठता है तो वो लंबे समय तक रहते है. इस कारण व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती और ढैय्या लंबे समय तक बने रहता है. शनि ग्रह की दृष्टि होने से आर्थिक स्थिति कमजोर होना, नौकरी-बिजनेस में हानि होना, कानूनी मामलों में फंसना, विवाह में अड़चन आदि सामना करना पड़ता है. इसके साथ ही व्यक्ति को कर्ज में इतना डूबा देते है, जिससे मनुष्य कंगाल भी बन जाते हैं.


मंगल ग्रह

ग्रहों की सेनापति मंगल ग्रह की स्थिति खराब होने पर भी व्यक्ति के जीवन पर बुरा असर पड़ता है. कुंडली में जब मंगल छठवें, आठवें और दसवें भाव में आता है, तो धन हानि बढ़ जाती है. जातक के जीवन में कर्ज काफी तेजी के साथ बढ़ने लग जाता हैं.


राहु ग्रह

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, राहु ग्रह को कठोर वाणी, जुआ, यात्राएं, चोरी, दुष्ट कर्म, त्वचा के रोग, धार्मिक यात्राएं आदि का कारक ग्रह माना जाता हैं, जिस व्यक्ति की जन्म कुंडली में राहु अशुभ स्थान पर बैठा हो, अथवा पीड़ित हो तो यह जातक को इसके नकारात्मक परिणाम प्राप्त होते हैं, इसके साथ ही ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को छाया ग्रह भी कहा गया है. वहीं किसी जातक की कुंडली में राहु शुभ ग्रहों के साथ बैठता है, तो वह लाभकारी साबित होता है. ऐसे में राहु के अशुभ प्रभाव होने के कारण व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है. इसके साथ ही आर्थिक नुकसान, कर्ज में डूब जाना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती हैं.


ग्रहों की ये स्थिति बनाती है व्यक्ति को अमीर और गरीब

ज्योतषि शास्त्र के अनुसार, कुंडली का दूसरा भाव या स्थान धन का माना गया है. इस भाव में ग्रहों की स्थिति ही व्यक्ति को अमीर या गरीब बनाती है. जब किसी जातक की कुंडली के द्वितीय भाव में बुध के होने और उस पर चंद्रमा की दृष्टि पड़ने से व्यक्ति को धन की किल्लत होने का संभावना रहती है. ऐसे में जातक बहुत प्रयास करने के बाद भी धन का संचय नहीं कर पाता है. वह धीरे- धीरे कर्ज के बोझ में दबते चला जाता हैं. कुंडली में ग्रहों की यह स्थिति जातक को कंगाल बनाती है, जिन लोगों की कुंडली में सूर्य और बुध दूसरे भाव में स्थिति होते हैं, उन लोगों के पास भी धन कभी भी नहीं टिकता है, इसके साथ ही जब किसी की कुंडली में चंद्रमा अकेला हो और उसकी कुंडली के द्वादश यानि बारहवें भाव में कोई ग्रह न हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति के आजीवन धनहीन होने का संकेत देती है, इसके अलावा जन्म कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा के स्थित होने और उस पर बुध की दृष्टि पड़ने पर भी उस व्यक्ति और उसके परिवार का धन नष्ट हो जाता है.


इन ग्रहों की स्थितियों के कारण मनुष्य होता है कंगाल

  • जब कुंडली में 11वें भाव यानि लाभ स्थान का स्वामी 6, 8 या 12वें भाव में बैठा होता है तो ऐसे में जातक हमेशा कर्ज के बोझ में दबा रहता है. कुंडली में ग्रहों की अशुभ दशा से व्यक्ति को जीवनभर आर्थिक संकटों का सामना करना पड़ता है.


  • ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब मनुष्य के जन्म कुंडली में 10वें भाव का स्वामी ग्रह 6, 8 या 12वें स्थान पर हो तो ऐसे जातकों को सगे संबंधियों से मान-सम्मान नहीं मिलता है, इसके साथ ही जातक के जीवन में आर्थिक तंगी तेजी के साथ बढ़ने लग जाता हैं.


  • कुंडली में दूसरे और 11वें भाव का स्वामी ग्रह 6, 8 या 12वें घर में जाकर बैठ जाए और मंगल-राहु धन स्थान पर हों तो ऐसे में जातक को गलत तरीके से धन संग्रह करने से बचना चाहिए. ऐसा धन कभी आबाद नहीं होता, बल्कि बर्बाद ही होता है. कभी-कभी जातक को इसी कारण से कंगाल होना पड़ जाता हैं.

 
 
 

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