The Influence of Astrology on Your Financial Situation: Why Are You Always Short of Money in Life?
- Jul 30, 2024
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जीवन में लंबे समय से पैसों की कमी रहने के ज्योतिषी कारण.
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, ग्रहों की स्थिति के हिसाब से व्यक्ति के जीवन में कई बड़े उतार चढ़ाव आते रहते हैं। कई बार आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण कर्ज में डूब जाते हैं। धन संबंधी कई समस्याओं सामना करना पड़ता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर होने के पीछे कुंडली में मौजूद ये तीन ग्रह है। इन तीन ग्रहों की स्थिति खराब होने से व्यक्ति को एक-एक पैसे के लिए भी मोहताज होना पड़ता है। जानिए इन ग्रहों के बारे में.

शनि ग्रह
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी जातक की कुंडली में शनि ग्रह बैठता है तो लंबे समय तक रहता है। इस कारण व्यक्ति की कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती और ढैय्या लंबे समय तक रहती है। शनि ग्रह की दृष्टि होने से आर्थिक स्थिति कमजोर होना, नौकरी-बिजनेस में हानि होना, कानूनी मामलों में फंसना, विवाह में अड़चन आदि सामना करना पड़ता है। शनि के कुदृष्टि से बचने के लिए शनिवार के दिन दिन सरसों का तेल अर्पित करें इसके साथ ही सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके साथ ही शनि के दोष को कम करने के लिए घोड़े की नाल से छल्ला बनवाकर बीच की अंगुली में पहन लें।
राहु ग्रह
ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को छाया ग्रह कहा जाता है। अगर किसी जातक की कुंडली में राहु शुभ ग्रहों के साथ बैठता है, तो वह लाभकारी साबित होता है। वहीं, अगर अशुभ ग्रहों के साथ बैठ जाता है, तो अशुभ फलों की प्राप्ति होती है। ऐसे में राहु के अशुभ प्रभाव होने के कारण व्यक्ति के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसके साथ ही आर्थिक नुकसान, कर्ज में डूब जाना जैसी समस्याएं शामिल है.
मंगल ग्रह
ग्रहों की सेनापति मंगल ग्रह हा स्थिति खराब होने पर भी व्यक्ति के जीवन पर बुरा असर पड़ता है। कुंडली में जब मंगल छठवें, आठवें और दसवें भाव में आता है, तो धन हानि बढ़ जाती है। इसके साथ ही छठे भाव में होने के कारण कर्ज भी तेजी से बढ़ जाता है। मंगल ग्रह की स्थिति को सही करने के लिए मंगलवार के दिन भगवान हनुमान की पूजा करें। इसके साथ ही किसी ज्योतिषी की सलाह लेकर मूंगा रत्न धारण कर लें। इससे लाभ मिलेगा।
ग्रहों की ये स्थिति बनाती है व्यक्ति को अमीर और गरीब
ज्योतषि शास्त्र के अनुसार, कुंडली का दूसरा भाव या स्थान धन का माना गया है. इस भाव में ग्रहों की स्थिति ही व्यक्ति को अमीर या गरीब बनाती है.
जब किसी जातक की कुंडली के द्वितीय भाव में बुध के होने और उस पर चंद्रमा की दृष्टि पड़ने से व्यक्ति को धन की किल्लत होने का संभावना रहती है. ऐसे में जातक बहुत प्रयास करने के बाद भी धन का संचय नहीं कर पाता है. वह धीरे- धीरे कर्ज के बोझ में दबते चला जाता हैं.
जिन लोगों की कुंडली में सूर्य और बुध दूसरे भाव में स्थिति होते हैं, उन लोगों के पास भी धन कभी भी नहीं टिकता है,
जब किसी की कुंडली में चंद्रमा अकेला हो और उसकी कुंडली के द्वादश यानि बारहवें भाव में कोई ग्रह न हो तो ऐसी स्थिति में व्यक्ति के आजीवन धनहीन होने का संकेत देती है,
जन्म कुंडली के द्वितीय भाव में चंद्रमा के स्थित होने और उस पर बुध की दृष्टि पड़ने पर भी उस व्यक्ति और उसके परिवार का धन नष्ट हो जाता है.
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Respectfully, my question is we are more than one in a family. Two do not believe in all this. How one alone can change the time. We cannot live without eachother as long as we are living.