Depression Astrology in Hindi
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Oct 7
- 2 min read
आज के समय में मानसिक तनाव और डिप्रेशन आम समस्या बन चुकी है। हर व्यक्ति किसी न किसी कारण से जीवन में निराशा, अकेलापन या मानसिक थकान महसूस करता है।
लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे ग्रहों की स्थिति भी हमारे मानसिक संतुलन को गहराई से प्रभावित करती है? ज्योतिष शास्त्र में चंद्रमा, शनि, राहु और केतु जैसे ग्रह व्यक्ति के मन, भावनाओं और सोच पर सीधा असर डालते हैं। अगर इन ग्रहों का संतुलन बिगड़ जाए, तो व्यक्ति डिप्रेशन, बेचैनी या मानसिक अस्थिरता का शिकार हो सकता है।

जानिए डिप्रेशन के ज्योतिषीय कारण, कौन से ग्रह व्यक्ति को मानसिक तनाव देते हैं और उनसे राहत पाने के ज्योतिष उपाय।
Depression Astrology in Hindi द्वारा Acharya Sunita Rao के मार्गदर्शन में अपने जीवन में शांति और संतुलन वापस लाएँ।
इस लेख में हम जानेंगे —
🔹 व्यक्ति के डिप्रेशन के मुख्य ज्योतिषीय कारण,
🔹 कौन से ग्रह और भाव इससे जुड़ते हैं,
🧠 1. चंद्रमा (Moon) की स्थिति
चंद्रमा मन, भावनाओं और मानसिक स्थिरता का प्रतिनिधित्व करता है।
यदि चंद्रमा अमावस्या का हो, पाप ग्रहों (शनि, राहु, केतु, मंगल) से पीड़ित हो या अष्टम भाव में स्थित हो —तो व्यक्ति भावनात्मक रूप से अस्थिर हो सकता है।
कमज़ोर चंद्रमा व्यक्ति को नकारात्मक विचारों और उदासी की ओर ले जाता है।
🪐 2. शनि (Saturn) का प्रभाव
शनि ग्रह जीवन में अवरोध, विलंब और एकांत का कारक है।जब शनि चंद्रमा पर दृष्टि डालता है या साढ़ेसाती/ढैय्या चल रही होती है, तो व्यक्ति के जीवन में निराशा, आत्म-संदेह और अकेलापन बढ़ जाता है।
🌫️ 3. राहु और केतु का प्रभाव
राहु भ्रम और मानसिक उलझन पैदा करता है जबकि केतु व्यक्ति को अलगाव और आत्मचिंतन की ओर ले जाता है।अगर राहु या केतु चंद्रमा या लग्नेश से जुड़ जाएँ, तो व्यक्ति को अवसाद, भय या असामान्य विचार होने लगते हैं।
🗣️ 4. बुध (Mercury) का असंतुलन
बुध विचार और संवाद का ग्रह है।जब बुध कमजोर होता है, तो व्यक्ति अपने विचारों को सही तरह से व्यक्त नहीं कर पाता और अंतर्मुखी या चिंतित रहने लगता है।
🏚️ 5. चौथा भाव (4th House) और उसका स्वामी
कुंडली का चौथा भाव मन की शांति और मानसिक स्थिति को दर्शाता है।यदि चौथा भाव पाप ग्रहों से पीड़ित हो या उसका स्वामी नीच राशि में हो, तो व्यक्ति को अंदरूनी अशांति और तनाव अधिक होता है।
🌕 6. ग्रहण योग या विष योग
यदि कुंडली में ग्रहण योग (सूर्य/चंद्रमा पर राहु-केतु का प्रभाव) या विष योग (शनि-चंद्र का संयोग) बनता है, तो मानसिक अस्थिरता और डिप्रेशन की संभावना बढ़ जाती है।
💫 निष्कर्ष
डिप्रेशन केवल मन की स्थिति नहीं, बल्कि ग्रहों की ऊर्जा का असंतुलन भी है।सही उपाय, मंत्र जाप, ध्यान और ज्योतिषीय मार्गदर्शन से व्यक्ति दोबारा संतुलन पा सकता है।
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