विदेश में PR या Green Card पाने में देरी – ज्योतिषीय कारण
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Dec 9, 2025
- 3 min read
विदेश में स्थायी निवास PR या ग्रीन कार्ड पाना कई लोगों का सपना होता है, लेकिन अक्सर सारे दस्तावेज़ और योग्यताएँ पूरी होने के बाद भी अप्रत्याशित देरी होने लगती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, व्यक्ति की कुंडली में कुछ ग्रह योग, दोष और दशाएँ ऐसी बाधाएँ उत्पन्न करती हैं जो विदेश संबंधी कार्यों में बाधा, इंतज़ार या रिजेक्शन तक का कारण बन सकती हैं।

1. राहु की कमजोर स्थिति या अशुभ प्रभाव
राहु विदेश यात्रा, विदेशी भूमि और विदेशी स्थायी निवास का मुख्य कारक है।समस्याएँ तब आती हैं जब:
राहु छठे, आठवें या बारहवें भाव में पाप ग्रहों से पीड़ित हो
राहु-अंतर या महादशा में बाधाएँ आएँ
राहु का शनि के साथ खराब युति हो
परिणाम:कागज़ों में देरी, बार–बार रिजेक्शन, unnecessary RFE, और अटके हुए केस।
2. बारहवें भाव (Foreign Settlement House) का अशुभ होना
12वाँ भाव विदेश में रहने का मुख्य घर है।यदि यह भाव/भावेश:
शनि/मंगल से पीड़ित हो
कमजोर हो (नीच राशि या ‘कमज़ोर दृष्टि’)
राहु/केतु की छाया में हो
तो PR प्रोसेस लंबा खिंचता है या व्यक्ति विदेश में टिक नहीं पाता।
3. शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या
शनि देरी का ग्रह है।साढ़ेसाती/ढैय्या के दौरान:
Case processing slow
Decision pending
Interview में delay
Visa officer से कठोर व्यवहारये सब आमतौर पर शनि से जुड़े प्रभाव हैं।
4. गुरु (जुपिटर) का कमजोर या वक्री होना
जुपिटर legal approvals, luck और visas का ग्रह है।यदि गुरु:
वक्री (retrograde) हो
नीच राशि में हो
छठे/आठवें भाव में हो
तो विदेशी मामलों में बार-बार अड़चनें आती हैं।
5. केतु का चौथे या दसवें भाव में प्रभाव
केतु बाधा, अनिश्चितता और भ्रम का कारक है।केतु की गलत जगह स्थिति से:
केस अटक जाना
Documentation में गड़बड़ी
बार-बार बदलती policies का नुकसानजैसे अनुभव मिलते हैं।
6. दशा–अंतर का प्रतिकूल संयोजन
अगर व्यक्ति की चल रही दशा:
शनि–केतु
मंगल–केतु
राहु–शनि
शनि–राहुजैसी कठिन हो, तो PR, ट्रैवल और विदेशी approvals delay हो जाते हैं।
7. मंगल दोष (विशेषकर यदि विदेश जाने की कोशिश job के लिए हो)
मंगल कार्यक्षेत्र और energy का ग्रह है।अशुभ मंगल:
नौकरी संबंधित डॉक्यूमेंट में अड़चन
Employer delay
Sponsorship रुक जानाका कारण बनता है।
8. भाग्य भाव (9th House) का कमजोर होना
विदेश में long-term settlement भाग्य भाव से भी देखा जाता है।अगर 9वाँ भाव कमजोर या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो approvals बार-बार अटकते हैं।
🟣 निष्कर्ष
विदेश में PR या ग्रीन कार्ड प्राप्त करने में होने वाली अनचाही देरी केवल दस्तावेज़ी कारणों से नहीं, बल्कि व्यक्ति की कुंडली में मौजूद ग्रहों की स्थिति, दशाएँ और योग भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। राहु, शनि, गुरु और बारहवें भाव से जुड़े दोष अक्सर अप्रत्याशित रुकावटें, बार-बार रिजेक्शन और लंबा इंतज़ार करवाते हैं।
हालाँकि सही समय, शुभ ग्रह दशाएँ और उचित उपाय इन बाधाओं को काफी हद तक कम कर सकते हैं और विदेश से जुड़ी योजनाओं को गति दे सकते हैं।
यदि आप भी विदेश में स्थायी निवास की कोशिश कर रहे हैं और लगातार देरी या अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, तो कुंडली का सटीक विश्लेषण आपके लिए आगे का स्पष्ट मार्ग दिखा सकता है।
लेखक: Acharya Sunita Rao
परंपरागत ज्योतिष और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाते हुए, Acharya Sunita Rao
पिछले 19 वर्षों से जीवन की समस्याओं का सटीक एवं सरल समाधान प्रदान कर रही हैं।
कुंडली विश्लेषण, विवाह, करियर, स्वास्थ्य, संतान, वित्त और ग्रह दशाओं में विशेषज्ञता।
प्रस्तुतकर्ता: Namaskar Astro
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