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इलाज के बाद भी बीमारी?कुंडली में छुपा कारण

  • Writer: Namaskar Astro by Acharya Rao
    Namaskar Astro by Acharya Rao
  • Dec 16, 2025
  • 2 min read

कई लोग ऐसे होते हैं जो नियमित इलाज और सावधानी के बावजूद भी किसी न किसी बीमारी से लगातार परेशान रहते हैं। कभी सर्दी–खांसी, कभी पेट संबंधी समस्या तो कभी मानसिक थकान — रोग जैसे जीवन का स्थायी हिस्सा बन जाते हैं। आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ ज्योतिष शास्त्र इस समस्या के पीछे छिपे ग्रह दोषों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आइए जानते हैं कि कुंडली में कौन-से ग्रह योग व्यक्ति को बार-बार बीमार रहने की स्थिति में डालते हैं।



🔍 बार-बार बीमारी के प्रमुख ज्योतिषीय कारण


1️⃣ लग्न और लग्नेश का कमजोर होना

लग्न व्यक्ति के शरीर और संपूर्ण स्वास्थ्य का प्रतीक होता है।यदि लग्नेश नीच राशि में हो, अस्त हो या पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर हो जाती है।


2️⃣ षष्ठ भाव (रोग भाव) का अशुभ प्रभाव

षष्ठ भाव सीधे रोगों और शत्रुओं से जुड़ा होता है।इस भाव में शनि, राहु, केतु या मंगल की उपस्थिति या षष्ठ भाव के स्वामी की कमजोरी लगातार रोगों का कारण बनती है।


3️⃣ चंद्रमा का दूषित होना

चंद्रमा मन, भावनाओं और तरल तत्वों का कारक है।यदि चंद्रमा पर राहु-केतु की दृष्टि हो या ग्रहण योग बने, तो व्यक्ति मानसिक तनाव, नींद की समस्या और उससे जुड़ी शारीरिक बीमारियों से ग्रसित रहता है।


4️⃣ सूर्य का कमजोर होना

सूर्य आत्मबल, ऊर्जा और रोग प्रतिरोधक शक्ति का कारक है।कमजोर सूर्य से थकान, बुखार, आंखों और हड्डियों से संबंधित रोग बार-बार उभरते हैं।


5️⃣ राहु–केतु का स्वास्थ्य भावों से संबंध

राहु और केतु अचानक और रहस्यमय रोग देते हैं।इनका लग्न, षष्ठ, अष्टम या द्वादश भाव से संबंध लंबे समय तक चलने वाली और बार-बार लौटने वाली बीमारियाँ देता है।


6️⃣ अष्टम भाव की पीड़ा

अष्टम भाव पुराने, छिपे और असाध्य रोगों का संकेत देता है।इस भाव में पाप ग्रह या उसका स्वामी पीड़ित हो तो व्यक्ति दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझता है।


7️⃣ अशुभ ग्रह दशा और अंतरदशा

कई बार कुंडली में बड़े दोष न होने पर भी व्यक्ति बीमार रहता है, क्योंकि उस समय शनि, राहु, केतु या षष्ठ भाव के स्वामी की दशा चल रही होती है।


निष्कर्ष (Conclusion)

यदि कोई व्यक्ति हमेशा किसी न किसी बीमारी से परेशान रहता है, तो यह केवल शारीरिक कारण नहीं बल्कि कुंडली में मौजूद ग्रह दोषों का संकेत भी हो सकता है। लग्न, षष्ठ भाव, चंद्रमा और सूर्य का संतुलन बिगड़ने से स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव पड़ता है। सही समय पर कुंडली विश्लेषण और उचित उपाय अपनाने से स्वास्थ्य में सकारात्मक परिवर्तन संभव है।


लेखक: Acharya Sunita Rao

परंपरागत ज्योतिष और आधुनिक जीवनशैली के बीच संतुलन बनाते हुए,

Acharya Sunita Rao पिछले 19 वर्षों से जीवन की समस्याओं का सटीक एवं सरल समाधान प्रदान कर रही हैं। कुंडली विश्लेषण, विवाह, करियर, स्वास्थ्य, संतान, वित्त और ग्रह दशाओं में विशेषज्ञता।


प्रस्तुतकर्ता: Namaskar Astro

Namaskar Astro एक विश्वसनीय डिजिटल मंच है जो ज्योतिष, वास्तु और आध्यात्मिक विषयों पर सटीक, व्यावहारिक और पाठक-हितैषी जानकारी प्रदान करना हमारा उद्देश्य है.

“सरल भाषा में ज्योतिष, ताकि हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और ग्रहों के प्रभाव को समझ सके।”


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Acharya Sunita Rao – ज्योतिष सलाहकार

 
 
 

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