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What Does Astrology Say About Liver-Related Diseases?

  • Writer: Namaskar Astro by Acharya Rao
    Namaskar Astro by Acharya Rao
  • Sep 13, 2024
  • 3 min read

लिवर से संबंधित रोगों के बारें में ज्योतिष शास्त्र क्या कहता है?


हर व्यक्ति के लिए सुखी और स्वस्थ जीवन के लिए  स्वस्थ लिवर बहुत जरूरी है। लिवर की बीमारी विभिन्न तरीकों से होती है जैसे प्री-हेपेटिक, हेपेटिक और पोस्ट हेपेटिक। लिवर पेट में दाहिनी ओर स्थित होता है, इसलिए ज्योतिष में लिवर जातक की कुंडली में पंचम भाव के अधिकार क्षेत्र में आता है। मानव शरीर में लिवर पैनक्रियाज के काफी नजदीक है, जो पाचन प्रक्रिया को सुचारू ढंग से चलने में मदद करता है। इसी वजह से अगर आपका लिवर सही तरीके से कार्य नहीं कर रहा है, तो आपका पाचन तंत्र प्रभावित होता है, जिससे आपका स्वास्थ्य बिगड़ सकता है। इससे न सिर्फ स्वास्थ्य बिगड़ता है बल्कि मानसिक परेशानी का भी सामना करना पड़ता है। लिवर रोग व्यक्ति के लिए काफी कष्टकारी होता है

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लिवर से संबंधित बीमारियों के ज्योतिषीय कारक

ज्योतिष में बृहस्पति लिवर और पैनक्रियाज पर शासन करता है, इसलिए यह स्पष्ट है कि ये अंग पंचम भाव और बृहस्पति के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। 9वां तथा 5वां भाव लिवर की बीमारी के लिए जिम्मेदार हैं। राशि चक्र में संबंधित राशियां सिंह और धनु हैं, जिन्हें ये रोग होने की आशंका बहुत अधिक होती है। इसलिए जातक की कुंडली के किसी भी भाव में बृहस्पति के पीड़ित होने पर जातक लिवर संबंधित रोग से पीड़ित होगा। यदि पंचम और नवम भाव में दु:ख का योग हो, तो रोग अधिक समय लेगा।


कुण्डली में कई गंभीर और अशुभ योग होते है, जो कुण्डली में दोष और लिवर रोग को उत्पन्न करते हैं।

  • मुख्य रूप से पैनक्रियाज और लिवर को बृहस्पति ग्रह नियंत्रित करता है। इसलिए इस ग्रह पर कोई भी कष्ट या परेशानी आने पर इसका सीधा प्रभाव लिवर पर पड़ता है। नतीजतन जातक को लिवर संबंधी बीमारी झेलनी पड़ती है।

  • छठे, आठवें या बारहवें भाव में पंचम भाव के स्वामी की उपस्थिति चाहे अल्पकालिक हो या दीर्घकालिक, दोनों ही तरह से लिवर की समस्याओं को जन्म देती है।

  • नवांश में बृहस्पति और शनि की स्थिति से लिवर के रोग होते हैं।

  • शनि और मंगल द्वारा बृहस्पति की पीड़ा छठे, आठवें या बारहवें भाव में होने से लिवर की बीमारी होती है।

  • पंचम या नवम भाव के स्वामी की शनि, मंगल, राहु या केतु के साथ युति, लिवर संबंधित बीमारियों की ओर ले जाती है।

लिवर से संबंधित बीमारियों के लिए कुछ ग्रहों की युति

  • अगर बृहस्पति शनि की दृष्टि से पीड़ित हो या साथ में पंचम भाव या अन्य भाव में स्थित हो, तो लिवर से जुड़े रोग होना तय है।

  • यदि पंचम भाव का स्वामी छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो और किसी पाप ग्रह से पीड़ित हो। इसके अलावा अगर बृहस्पति और शनि नौवें भाव में हों या दोनों ग्रह नवांश में भी हों। इसी तरह अगर मंगल, शनि, राह और केतु 5वें या 9वें स्वामी के साथ युति करें, तो जातक को पीलिया रोग हो सकता है।

  • जब नवांश लग्न से पंचम और नवम भाव मंगल, शनि, राहु और केतु से पीड़ित हो। यदि बृहस्पति छठे, आठवें, बारहवें भाव में स्थित हो और शनि, मंगल आदि पाप ग्रहों से पीड़ित हो, तो रोग गंभीर रूप ले लेगा।


बृहस्पति ग्रह से संबंधित बीमारियां

बृहस्पति ग्रह जांघों, वसा, मस्तिष्क, लिवर ,किडनी, फेफड़े, कान, जीभ, स्मृति आदि का कारक है।

कुंडली में पीड़ित बृहस्पति अपने कारक तत्वों से संबंधित स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं देता है।

  • यदि आपकी कुंडली में गुरु कमजोर है तो आपको लिवर, पीलिया, मोटापा, कैंसर,कान, मधुमेह, जीभ, याद्दाश्त और पैनक्रियाज से संबंधित समस्या का सामना करना पड़ सकता है।


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NOTE :- यहां दी गई जानकारी सिर्फ जागरूकता हेतु दी गई है, कृपया आगे बढ़ने से पहले किसी विद्वान एस्ट्रोलॉजर से संपर्क करे.



 
 
 
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