"How Astrology Can Guide Your Educational Journey and Shape Your Future"
- Namaskar Astro by Acharya Rao

- Oct 7, 2024
- 3 min read
शिक्षा में ज्योतिष का महत्व.
सभी अपने बच्चो का शिक्षा का स्तर उच्च रखने की इच्छा रखते हैं।आज के समय में सभी माता पिता अपने बच्चो की शिक्षा को लेकर चिन्तित रहते हैं और उन्हें अच्छी शिक्षा देने की कोशिश करते हैं। समय के साथ धीरे-धीरे शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। शिक्षा का स्वरुप अत्यधिक बदला है। वर्तमान में आजीविका के लिए अच्छी शिक्षा आवश्यक है। आज के समय की मांग व क्षमतानुसार तथा मानसिकता के अनुसार शिक्षा प्राप्त करानी चाहिए जो आगे चलकर जीवन निर्वाह लिए सहायक सिद्ध हो सके। शिक्षा किस क्षेत्र में प्राप्त करने के लिए कुंडली के अनुसार शिक्षा से जुड़े भावों पर विचार करना आवश्यक है। जिससे की उसी क्षेत्र में सफलता मिल सके।

कुण्डली के दूसरे, चतुर्थ तथा पंचम भाव से शिक्षा का प्रत्यक्ष रुप में संबंध होता है।
इन भावों पर विस्तार से अध्यन करके ही शिक्षा क्षेत्र को चुने ताकि सफलता प्राप्त हो सकेI
द्वितीय भाव का शिक्षा पर प्रभाव
बच्चा पांच वर्ष तक के सभी संस्कार अपने परिवारिक वातावरण से पाता है। पांच वर्ष तक जो संस्कार बच्चे के पड़ जाते हैं, वही अगले जीवन का आधार बनते हैं। इसलिए दूसरे भाव से परिवार से मिली शिक्षा अथवा संस्कारों का पता चलता है। इसी भाव से पारीवारिक वातावरण के बारे में भी पता चलता है। बच्चे की प्रारम्भिक शिक्षा के बारे में इस भाव की मुख्य भूमिका है। जिन्हें बचपन में औपचारिक रुप से शिक्षा नहीं मिल पाती है, वह भी जीवन में सफलता इसी भाव से पाते हैं। इस प्रकार बच्चे के आरंभिक संस्कार दूसरे भाव से देखे जाते हैं।
चतुर्थ भाव का शिक्षा पर प्रभाव
कुण्डली का सुख भाव भी कहलाता है।आरम्भिक शिक्षा के बाद स्कूल की पढा़ई का स्तर इस भाव से देखा जाता है। इस भाव के आधार पर ज्योतिषी भी बच्चे की शिक्षा का स्तर बताने में सक्षम होता है। वह बच्चे का मार्गदर्शन, विषय चुनने में कर सकता है। चतुर्थ भाव से उस शिक्षा की नींव का आरम्भ माना जाता है, जिस पर भविष्य की आजीविका टिकी होती है अक्षर के ज्ञान से लेकर स्कूल तक की शिक्षा का आंकलन इस भाव से किया जाता है।
पंचम भाव का शिक्षा पर प्रभाव
इस को शिक्षा में सबसे महत्वपूर्ण भाव माना गया है। इस भाव से मिलने वाली शिक्षा आजीविका में सहयोगी होती है। वह शिक्षा जो नौकरी करने या व्यवसाय करने के लिए उपयोगी मानी जाती है, उस पर विचार पंचम भाव से किया जाता है। आजीविका के लिए सही विषयों के चुनाव में इस भाव की महत्वपूर्ण भूमिका है।
शिक्षा प्रदान करने वाले ग्रह बुध को बुद्धि का कारक ग्रह माना गया है ।गुरु ग्रह को ज्ञान व गणित का कारक ग्रह माना गया है जिस बच्चे की कुंडली में गुरु अच्छी स्थिति में हो उसका गणित अच्छा होता है। बच्चे की कुण्डली में बुध तथा गुरु दोनों अच्छी स्थिति में है तो शिक्षा का स्तर भी अच्छा होगा ।
इन दोनों ग्रहों का संबंध केन्द्र या त्रिकोण भाव से है तब भी शिक्षा क स्तर अच्छा होगा। इसके आलावा कुंडली में पंचमेश की स्थिति क्या है। तथापि, इस पर भी अध्यन करना अति आवश्यक होता है। इस के अतिरिक वर्ग कुण्डलियों से शिक्षा से जुडे़ भाव तथा ग्रहों का अध्यन करना भी आवश्यक है। परन्तु, इन भावों के स्वामी और शिक्षा से जुडे़ ग्रहों की वर्ग कुण्डलियों में स्थिति कैसी है, इसका पर विशेष आंकलन करना बहुत आवश्यक है।
NOTE :- यहां दी गई जानकारी सिर्फ जागरूकता हेतु दी गई है, कृपया आगे बढ़ने से पहले किसी विद्वान एस्ट्रोलॉजर से संपर्क करे.
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